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शुरु करे सोलर आटा चक्की का बिजनेस, बिजली की खपत कम होने के साथ आमदनी भी लाखों में होगी

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खाद्य पदार्थों में सभी के घरों में इस्तेमाल होने वाला आटा एक बेहद हीं अनिवार्य सामान है। जैसे की हमलोगों को पता होगा की खेतों में लगने वाले गेहूं के पौधों को तैयार होने के बाद उसकी कटाई और उलाई करने के बाद उसे आटा चक्की में पिसाई की जाती है। गेंहू को पिसाई करने के बाद वह आटा के रुप में आ जाता है। अगर गेंहू की पिसाई करने वाले आटा चक्की की बात करे तो यह पहले के समय में डीजल इंजन के माध्यम से चलता था, लेकिन आज के समय में यह इलेक्ट्रिक तथा सोलर लाईन के माध्यम से भी चल रहा है।

आज हम बात करेंगे सोलर आटा चक्की तथा उससे जुड़ी सभी जानकारीयों के बारे में-

सौर आटा चक्की क्या है

सौर आटा चक्की सुर्य के प्रकाश से चलने वाली आटा चक्की है, जिसमे किसी डीज़ल इंजन या विधुत की आवश्यकता नहीं होती है। इसमे सोलर पैनल लगे होते हैं जो की दिन में सुर्य के प्रकाश से बिजली बनाने का काम करता है। इसी बिजली के माध्यम से सौर आटा चक्की संचालित होता है। इस सौर आटा चक्की की एक खासियत है की यह दिन में हीं काम करता है अर्थात यह सुर्यास्त के बाद काम करना बंद कर देता है।

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कैसे करता है काम

सोलर पैनल (Solar Panel) सूर्य की रोशनी से DC बिजली बनाता है और VFD की मदद से इस बिजली को AC बिजली में बदला जाता है ।सोलर पैनल को ऐसी जगह पर इनस्टॉल किया जाता है जहाँ पूरा दिन सूर्य की रोशनी आती हो। सोलर पैनल का इंस्टालेशन पैनल स्टैंड पर मजबूती के साथ कसा जाता है और सोलर वायर की मदद से MCB डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स तक लाया जाता है।

एक बार खर्च उसके बाद आमदनी

सोलर आटा चक्की एक इसके पीछे का कारण यह है कि सोलर आटा चक्की में महज एक बार तो थोड़ा खर्चा करना पड़ता है, पर इसके बाद कोई रनिंग काॅस्ट नहीं होती है। वहीं सोलर प्लांट की लागत महज दो से 3 साल में निकल आती है। इसके बाद सिर्फ लेबर और छोटे मोटे खर्चों के अलावा कोई अन्य खर्चा नहीं होता। आमतौर पर सोलर सिस्टम की लाइफ कम से कम 25 साल होती ही है, ऐसे में 3 साल में लागत निकालने के बाद बस कमाई ही कमाई होनी है।

सोलर आटा चक्की एक अच्छा विकल्प

सोलर आटा चक्की (Solar Atta Chakki) एक बहुत हीं अच्छा विकल्प के रुप में प्रचलित हो चुका है। इससे आप दिन भर में 700-1000 किलो अनाज की पिसाई आसानी से कर लेते हैं। इस सौलर के माधय्ं से चलेगा जिसमे कुल खर्च जीरो रूपये होता है। अगर साधारण मशीन से Solar प्रति किलो ₹2 पिसाई लगती है इस तरह से आप सौलर चक्की से 1000 से ₹2000 प्रतिदिन आसानी से कमा सकते हैं।

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क्या है लागत

सोलर आटा चक्की की एक खासियत है की इसमे लागत खर्च मात्र एक बार हीं लगाते है। एक मोटा-मोटी अनुमान लगाए तो 15 किलोवाट सोलर सिस्टम (15 kW Solar Panel System) लगाने का खर्च लगभग 7,50,000 रुपये आता है जिनमें- सोलर पैनल, VFD, पैनल स्टैंड, सोलर वायर, लाइटिंग अर्रेस्टर, अर्थिंग किट, DCDB Box, MC4 Connector और Solar Installation शामिल होता है।

अब है काफी डिमांड

पैट्रोल-डीजल के बढ़ते महंगाई के कारण साधारण आटा चक्की को महंगाई का मार झेलना पड़ रहा है। इसलिए आज के समय में सौर आटा चक्की का डिमांड काफी बढ़ चुका है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है की इसमे एक बार हीं लागत है, इसके बाद इसका मेंटेनेंस चार्ज भी काफी कम लगता है। इसके माध्यम से बीजा पैसा इन्वेआत अच्छी-खासी कमाई की जा सकती है

 

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अपना स्टार्टअप शुरू करने के लिए छोड़ दी 40 लाख की नौकरी, आज 100 करोड़ की कंपनी की मालकिन हैं शैली गर्ग

अपना स्टार्टअप शुरू करने के लिए छोड़ दी 40 लाख की नौकरी, आज 100 करोड़ की कंपनी की मालकिन हैं शैली गर्ग

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She left a job of Rs 40 lakh to start her own startup, today she is the owner of a company worth 100 crores: Shaily Garg

अगर इंसान को खुद के फैसले पर भरोषा हो तो उसे जीवन में सफलता जरूर मिलती है। जी हां, आज हम आपको एक ऐसे हीं महिला से रूबरू कराने वाले हैं जिन्होंने खुद पर विश्वास रखकर अपनी लाखों के पैकेज वाली नौकरी छोड़ दी क्यूंकि उन्हे पता था कि वे अपने जीवन में इससे भी बेहतर कर सकती हैं।

कौन है वह महिला ?

हम बात कर रहे हैं 30 वर्षीय शैली गर्ग (Shaily Garg) की, जो राजस्थान (Rajasthan) के अजमेर जिले के नसीराबाद कस्बे से ताल्लुक रखती हैं। इनके पिता का नाम मुकेश गर्ग है, जो नसीराबाद SBI बैंक में कैश ऑफिसर हैं तथा उनकी मां का नाम मधु गर्ग है, नसीराबाद की सरकारी बालिका स्कूल में एक व्याख्याता के रूप में काम करती हैं।

वहीं अगर शैली (Shaily Garg) के भाई की बात करे तो उनके भाई का नाम अभिनव गर्ग है, जो साउथ कोरिया में सैमसंग कंपनी में कंप्यूटर इंजीनियर हैं। उनके पति अभिषेक अग्रवाल कैलिफोर्निया में फेसबुक में कंप्यूटर इंजीनियर हैं।

Global Entrepreneur shaily garg

कहां से पूरी की पढ़ाई?

शैली अपनी शुरुआती पढ़ाई नसीराबाद से पूरी करने के बाद में अजमेर के सेंट मेरी कॉन्वेट स्कूल में पढ़ने लगीं। उन्होंने छठीं से बारहवीं तक की पढ़ाई इसी स्कूल से पूरी की।

बता दें कि, इनके मां का सपना था कि बेटी पढ़ लिखकर एक डॉक्टर बने लेकिन उनका यह सपना पूरा नहीं हो पाया क्यूंकि शैली का मैथ्स काफी अच्छा था तो उन्होंने इंजीनियरिंग करने का फैसला लिया। उन्होंने वर्ष 2015 में मुंबई से आईआईटी परीक्षा सिविल ब्रांच में पास किया।

Global Entrepreneur shaily garg

खुद के स्टार्टअप शुरू करने के लिए छोड़ा, 40 लाख रुपए के सालाना पैकेज वाली नौकरी

इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद सबसे पहले शैली ने मुंबई का रुख किया और इसके बाद सीएनजी चंडीगढ़ गई। लेकिन अंततः उन्होंने गुड़गांव में जॉब किया। यहां उनका सालाना पैकेज 40 लाख रुपए था। लेकिन साल 2020 में उन्होंने इस जॉब को छोड़ने का फैसला लिया ताकि वे खुद के स्टार्टअप की शुरुआत कर सकें।

नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने छोटे-छोटे देश के मैन्यूफ्रैक्चर्स को एक्सपोर्ट प्लेटफार्म उपलब्ध कराने का काम शुरू किया और इसी दौरान उनकी शादी नवम्बर 2020 में पटियाला निवासी अभिषेक अग्रवाल के साथ कैलिफोर्निया में सेटल हो गईं।

स्टार्ट किया खुद का स्टार्टअप

शैली (Shaili Garg) ने 40 लाख रुपए के सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़ खुद का स्टार्टअप शुरू किया। बता दें कि एक शादी शुदा औरत होने के बावजूद भी उन्होंने अपने काम को पूरी मेहनत के साथ किया और आज के समय में उन्हे फोर्ब्स एशिया की टॉप-30 सक्सेस फुल लोगों की लिस्ट में शामिल किया गया है। इतना हीं नहीं उन्होंने महज दो साल में कंपनी का टर्नओवर 100 से 110 करोड़ रुपए तक पहुंचा दिया है तथा उनकी कंपनी में करीब 84 मेंबर हैं।

खुद की पहचान किया स्थापित

अपने लगन और मेहनत के बदौलत शैली (Shaili Garg) ने 100 करोड़ की कंपनी खड़ी कर दी और आज के समय में वे कंस्ट्रक्शन मटेरियल सप्लाई का काम कर रही है। वे अब देश की सबसे कामयाब हुई महिलाओं की सूची में भी शामिल हैं।

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VAISHALI: साल में चार जॉब, फिर शादी के 30वें दिन बहू BPSC में सफल, मिलिए ऑफिसर दुल्हन से!

VAISHALI: साल में चार जॉब, फिर शादी के 30वें दिन बहू को मिला BPSC, मिलिए ऑफिसर दुल्हन से!

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सपने तो हर कोई देखता है, लेकिन ऐसे बहुत कम लोग होते हैं जो अपने सपनों को सच करते हैं। बिहार के हाजीपुर की रुचिला रानी उन लोगों में से हैं जिन्होंने न सिर्फ अधिकारी बनने का सपना देखा बल्कि आज उस सपने को भी पूरा किया है।

एक साल में चार सरकारी नौकरी की परीक्षा पास कर चुके रुचिला ने शादी एक महीने तक खत्म होते ही बीपीएससी पास कर जिले को फेमस कर दिया है, जिसके बाद से लोग अफसर की बेटी के ससुराल होने की बात कहने लगे हैं।

ग्रामीण परिवेश और मध्यम वर्गीय परिवार से आने वाली रुचिला ने अपनी मेहनत और कठिन परिश्रम से ना सिर्फ एक साल में चार सरकारी नौकरी हासिल की बल्कि शादी के तीसवें दिन ही बीपीएससी की परीक्षा पास कर अधिकारी बन गई हैं, जिसके बाद उसके मायके से लेकर ससुराल तक जश्न का माहौल है. मायके में घरवलों के साथ-साथ गांव के लोग भी अपनी इलाके की बेटी की इस सफलता पर उत्साहित हैं तो पति को भी अपनी नई नवेली दुल्हन पर गर्व हो रहा है.

VAISHALI: Four jobs in a year, then daughter-in-law got BPSC on 30th day of marriage, meet officer bride!

बीपीएससी की परीक्षा में 215वां रैंक पाने वाली रुचिला ने घर पर ही रहकर सेल्फ स्टडी से यह मुकाम हासिल की है. इसके पीछे उसके माता पिता का बहुत बड़ा योगदान है. पेशे से सरकारी शिक्षक उसके पिता ने पाई-पाई जोड़कर अपनी बेटी को पढ़ाया और समाज की परवाह किये बगैर अपनी बेटी को इतना काबिल बनाया कि आज बेटी के मायके से लेकर ससुराल तक उत्साह है.

रूचिला की मां ने अपनी बेटी को उन लोगो की नजरों से छिपाकर रखा जो लोग बेटियों को घर मे बिठाने पर ताना मारने का काम करते हैं, मां ने तो आज तक अपने पैरों में पायल तक नहीं पहना क्योंकि पायल की आवाज बेटी की पढ़ाई में खलल डाल सकता था लेकिन आज बेटी की सफलता की गूंज पूरे जिले में सुनाई दे रही है.

बीपीएससी पास करने और प्रोबेशनरी ऑफिसर बनने से पहले रुचिला ने फरवरी महीने में शराबबंदी विभाग में बिहार के शिक्षकों, बिहार पुलिस, रेलवे के इंस्पेक्टर की नौकरी में अपनी जगह बनाई थी, लेकिन आखिरकार सिविल सेवा में जाने का जुनून विकसित हो गया। उन्होंने बीपीएससी की परीक्षा दी, इसे भी पास किया।

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छत्तीसगढ़ मे ‘ग्रीन गोल्ड’ से किसान हुए अमीर, तीन महीने में ही लाखों रुपये का फायदा

छत्तीसगढ़ के ‘ग्रीन गोल्ड’ के तेंदूपत्ता किसान हैं अमीर, तीन महीने में ही लाखों रुपये का फायदा

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क्या आप जानते है, छत्तीसगढ़ का हरा सोना किसे कहा जाता है? अगर नहीं तो हम आपको बता दें कि, तेंदूपत्ता को हीं यहां हरे सोने का नाम दिया जाता है क्योंकि इसकी बिजनेस से आप सोने चांदी के बराबर की कमाई कर सकते हैं। यहां के आदिवासी इसकी खेती कर अच्छा मुनाफा कमाते है इसके अलावें इस खेती से सरकार को भी अच्छा मुनाफा प्राप्त होता है।

आखिर क्यों है इतना महंगा हरा सोना?

बता दें कि, तेंदूपत्ता से बीड़ी तैयार होती है और उसे खरीदने के लिए लोग साउथ से छत्तीसगढ़ जाते है। जानकारी के मुताबिक, केवल इनकी तोड़ाई से आदिवासी लोगों को अच्छी कमाई प्राप्त हो जाती है।

Farmers earning Crores From Green Gold Tendupatta

गुणवता के वजह से है काफी डिमांड

तेंदूपत्ता के गुणवाता के वजह से ही। इनकी मार्केट में भारी डिमांड है। कहा जाता है कि, यह एक ऐसा कारोबार है कि अगर इसमें थोड़ा भी लापरवाही बरती जाए तो वो इसके गुणवत्ता को कम कर सकता है।

बता दें कि, यह आकार और अपने मोटापन की वजह से बीड़ी के लिए इस्तेमाल होते हैं और इसी कारण वश भी इसकी खूब डिमांड है।

तीन महीने तक 75 लाख लोगों को मिलता है रोजगार

द ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के आंकड़े के अनुसार, तेंदूपत्ता से 75 लाख लोगों को तीन महीने तक रोजगार मिलता है और जब इन पत्तो से बीड़ी बनती है तो उस काम में भी करीबन 30 लाख लोगों को तो रोजगार मिलती हीं है।

Farmers earning Crores From Green Gold Tendupatta

अब राज्य सरकार भी दे रही है इस पर तवज्जो

पहले तेंदूपत्ता के संग्रहण करने वाले आदिवासियों की हालात बेहतर नहीं थे क्यूंकि उस दौरान तेंदूपत्ता के रेट भी कम थे लेकिन आज के समय में तो राज्य सरकार भी इसको तवज्जो देने लगी है।

रिपिर्ट्स के मुताबिक, वर्ष 2002 की बात करें तो उस समय प्रदेश में तेंदुपत्ता का मूल्य 400 रुपए प्रति मानक बोरा था लेकिन आज के समय में इसे बढ़ाकर 1500 रुपए बोरा कर दिया गया है। तथा आज के समय में इसका दाम चार हजार रुपए प्रति मानक बोरा है। अब इसकी दिन प्रतिदिन इतना रेट बढ़ रहा है कि, आदिवासियों के लिए यह बहुत खुशी की बात है क्योंकि रेट बढ़ने के साथ इनकी आमदनी भी बढ़ी है।

अप्रैल माह में होती है तेंदूपत्ते की तोड़ाई

बता दें कि, आदिवासी लोग अप्रैल माह में तेंदूपत्ते की तोड़ाई करते हैं। बता दें कि, एक बोरे में तेंदूपत्ते की एक हजार गड्डी होती है और हर गड्डी में 50 पत्ते होते हैं। इन पत्तों की गड्डियों को धूप में सुखाया जाता है और इससे बीड़ी बनाया जाता है।

विदेशों में भी है भारी मांग

आज के समय में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल जैसे देश के कई राज्यों में तेंदूपत्ते की खूब डिमांड है इसके साथ ही विदेशों जैसे अफगानिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार और बांग्लादेश जैसे कई देशों में भी इसकी भारी मांग है।

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