मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को दिलाया पहला स्वर्ण पदक

मीराबाई चानू ने कम उम्र में ही लिफ्टिंग शुरू कर दी थी। वह 11 साल की उम्र में अंडर-15 चैंपियन और 17 साल की उम्र में जूनियर चैंपियन बन गई थीं। लेकिन ओलंपिक 2016 ने उनका करियर रोक दिया। मीराबाई ओलंपिक में

अपने नाम के इतर ‘खत्म नहीं हुआ’ लिखने वाली दूसरी खिलाड़ी थीं।

वे अपने इवेंट को पूरा नहीं कर सकी थीं। इस कारण वे अपने खेल में काफी पीछे हो गई थीं। इसने उनके मनोबल को बुरी तरह तोड़ दिया था। इसके बाद वे डिप्रेशन में चली गईं और उन्हें मनोचिकित्सक की मदद तक लेनी पड़ी थी। इसके बाद उन्होंने खेल से अलविदा लेने तक मन बना लिया था। लेकिन शायद उनके खेल करियर को दूसरी ओर जाना था।

अब मीराबाई चानू की मेहनत के बलबूते पर भारत ने अपना पहला गोल्ड मेडल जीत लिया है। आखिकार भारत के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स के पहले गोल्ड का सपना पूरा कर दिया है। उन्होंने महिला वेटलिफ्टिंग के 49 किग्रा वेट कैटेगरी में पहला स्थान हासिल किया।

मीराबाई चानू ने लगातार दूसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता है। इससे पहले 2018 गोल्ड कोस्ट में भी वे पहले नंबर पर रही थीं। साल 2020 टोक्यो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीता था। मौजूदा कॉमनवेल्थ गेम्स की बात करें, तो भारत को अब तक 3 मेडल मिले हैं और तीनों ही मेडल वेटलिफ्टर्स ने दिलाए हैं। इससे पहले पुरुष कैटेगरी में संकेत महादेव सरगर ने सिल्वर और गुरुराज पुजारी ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था।

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