VAISHALI: मजदूरी के अभाव में पलायन कर रहे हैं गरीब मजदूर

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VAISHALI: मजदूरी के अभाव में पलायन कर रहे हैं गरीब मजदूर

मानसून की समय पर दस्तक देने के बावजूद मौसम की बेरूखी के कारण जहां सूखे की स्थिति उत्पन्न हो रही है। वहीं किसानों के साथ-साथ मजदूर भी परेशान हैं। मजदूरी तो बाकी है ही, मजदूरों को फिलहाल न खेतों में काम मिल रहा है और न ही पंचायत और प्रखंड में चलाई जा रही योजनाओं में ही। राशि के अभाव में कई जगहों पर इन दिनों कई योजनाओं पर ब्रेक लगा हुआ है। इससे मजदूर दूसरे राज्यों में पलायन भी कर रहे हैं।

पलायन का प्रमुख कारण यह सामने आया है कि कई प्रखंडों में मजदूरों का भुगतान हुआ ही नहीं है। सिर्फ सहदेई की बात करें तो यहां एक करोड़ नौ लाख रुपए मजदूरों का बकाया है। डीआरडीए निदेशक संजय कुमार निराला ने इस संबंध में कहा कि करीब एक-डेढ़ महीने से भुगतान रुका था। जल्द ही भुगतान कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि महुआ, लालगंज समेत अन्य प्रखंडों में वाया और अन्य बरसाती नदियों के बंधों के दुरुस्त करने और नहरों की सफाई का काम चल रहा है। सहदेई बुजुर्ग प्रखंड में राशि के अभाव में इन दिनों कई योजनाओं के काम पर ब्रेक लगा है। काम नहीं मिलने के कारण मजदूरी की तलाश में मजदूर दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं। यहां के मजदूर सबसे ज्यादा चेन्नई, तिरपुर, कोलकाता, गुजरात, कानपुर, गुवाहाटी और पड़ोसी देश नेपाल, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब जा रहे हैं। ज्यादातर मजदूरों को ट्रेन से ही पलायन करते हुए देखा जा रहा है।

मजदूरों का कहना है कि सुखाड़ के कारण खेती चौपट हो गई है। इसके कारण उन्हें खेतों में भी काम नहीं मिल रहा है। इसके अलावा मनरेगा योजना में भी मिट्टी का कार्य बंद होने के कारण वे रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जा रहे हैं। सहदेई प्रखंड क्षेत्र में मनरेगा के तहत कुल 10478 मजदूर अधिकृत हैं।

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जिसमें 3490 मजदूरों के द्वारा मिट्टी भराई, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले घरों, बांध मरम्मत, जलनिकासी नाला का निर्माण, नहर उड़ाही के अलावा अन्य कार्य किए गए। मनरेगा में मजदूरों के द्वारा 52,350 दिन कार्य किया गया। जिसमें मजदूरों का भुगतना करने के बाद एक करोड़ 9 लाख 6500 रुपए बाकी है। बताया गया कि मिट्टी भराई का कार्य पिछले 15 जून से बंद हो गया। वहीं रुपए के अभाव में पशु शेड निर्माण, पुल पुलिया, ईंट शोलिंग, चबूतरा निर्माण का कार्य भी बंद पड़ा हुआ है। पूर्व की योजना का मेटेरियल का लगभग 52 लाख रुपए बाकी है। कार्य नहीं होने के कारण मजदूर पलायन करने को मजबूर हैं।

वैशाली में मजदूरों का लाखों रुपए बकाया

सूखा संकट की स्थिति देखते हुए वैशाली प्रखंड से बड़े पैमाने पर मजदूरों का पलायन जारी है। मजदूर बस, ट्रेन आदि से घर छोड़कर पलायन करने को मजबूर हैं। ज्यादातर मजदूर दक्षिण भारत के तामिलनांडु, पुणे आदि शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। फुलाढ़ गांव के मजदूर उमेश पासवान, प्रवेश पासवान आदि ने बताया कि तामिलनांडु, पूणे आदि शहरों में व्यापक पैमाने पर अपार्टमेंट या फैक्ट्रियों में काम मिलता है। मजदूरों ने बताया कि वे सभी मनरेगा योजना में कार्य कर जीवन यापन कर परिवार वालों का भरण-पोषण करते थे, मगर 15 जून के बाद यहां मनरेगा योजना का कार्य नहीं हो पा रहा है। जिस कारण भूखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। वैशाली में मजदूरों का लाखों रुपए बकाया है। पांच जून के बाद मजदूरों के खाते में मनरेगा योजना की राशी आई ही नहीं है। कार्य करने के बाद भी रुपए के लिए मजदूर टकटकी लगाए आशा भरी निगाह से सरकार की ओर देख रहे हैं, कि कब उनका पैसा खाते में आएगा। प्रशासन मजदूरों को कार्य देने के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर रहा है। वैशाली के 16 पंचायत में अब तक महज 07 यूनिट पौधरोपण कार्य की प्रगति होने की बात कार्यक्रम पदाधिकारी अरुण कुमार ने बताई। इस सात यूनिट में महज सात मजदूरों को ही रोजगार मिल पाएगा। सिर्फ वैशाली में पीएम आवास योजना में 03 हजार मजदूरों को उनके निजी कार्य में काम देकर कागजी खानापूर्ति कर सरकार को रिपोर्ट सौंपी जा रही है। जबकि हकीकत कुछ और है।

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(Image: फाइल फोटो)

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